▪️भूमिका (Introduction): BP की दवा लेने के बाद भी BP हाई — ये भ्रम क्यों पैदा होता है?

जब कोई इंसान पहली बार हाई ब्लड प्रेशर का मरीज बनता है, तो डॉक्टर दवा शुरू करवाते हैं। शुरुआत में अक्सर BP कुछ हफ्तों या महीनों में कंट्रोल में आ भी जाता है। यहीं से लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि अब समस्या खत्म हो गई है। लेकिन समय के साथ जब BP फिर से बढ़ने लगता है, तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि “दवा बेकार है” या “बीमारी बहुत बढ़ गई है”।
असल में ब्लड प्रेशर कोई साधारण बीमारी नहीं है, जिसे सिर्फ गोली से पूरी तरह खत्म किया जा सके। यह शरीर, दिमाग और जीवनशैली तीनों से जुड़ी हुई समस्या है। दवा केवल एक सहारा है, पूरा इलाज नहीं। अगर बाकी चीजें ठीक नहीं हैं, तो दवा अकेले BP को कंट्रोल नहीं कर पाती। यही कारण है कि लाखों लोग रोज़ BP की दवा लेते हैं, फिर भी उनकी मशीन पर रीडिंग हाई आती रहती है।
इस लेख में हम यही समझेंगे कि दवा लेने के बावजूद BP हाई क्यों रहता है और इसके पीछे कौन-कौन से असली कारण होते हैं, जिन पर अक्सर ध्यान ही नहीं दिया जाता।.
1.BP की दवा सही समय और सही तरीके से न लेना
ब्लड प्रेशर की दवाएँ तभी सही तरह से काम करती हैं, जब उन्हें रोज़ एक तय समय पर लिया जाए। बहुत से लोग सोचते हैं कि “दवा तो रोज़ ले ही रहे हैं”, लेकिन असलियत यह होती है कि कभी सुबह देर हो जाती है, कभी शाम को भूल जाते हैं, और कभी खाना खाकर तो कभी खाली पेट गोली खा ली जाती है।
दवा शरीर में एक निश्चित स्तर बनाती है। अगर यह स्तर रोज़ बदलता रहता है, तो BP भी ऊपर-नीचे होता रहेगा। कई बार सिर्फ इसी वजह से BP कंट्रोल नहीं हो पाता, जबकि दवा सही होती है। कुछ लोग यात्रा में, शादी-ब्याह में या व्यस्त दिनचर्या में दवा छोड़ भी देते हैं, और उन्हें इसका एहसास तक नहीं होता कि इससे कितना फर्क पड़ता है।
2. BP नॉर्मल दिखते ही BP की दवा कम या बंद कर देना
यह सबसे खतरनाक गलती है। जैसे ही BP कुछ दिनों तक नॉर्मल आता है, लोग मान लेते हैं कि अब दवा की जरूरत नहीं रही। कोई आधी गोली लेने लगता है, कोई एक दिन छोड़कर, और कोई पूरी तरह बंद कर देता है। कुछ हफ्तों बाद जब BP अचानक बढ़ता है, तब घबराहट शुरू होती है।
ब्लड प्रेशर की बीमारी ठीक नहीं होती, सिर्फ कंट्रोल में रहती है। दवा BP को नॉर्मल दिखाती है, लेकिन बीमारी अंदर मौजूद रहती है। दवा बंद करते ही BP दोबारा बढ़ जाता है, कई बार पहले से ज्यादा। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद करना या घटाना बहुत बड़ा जोखिम हो सकता है।
3. नमक और खाने की आदतें — दवा की सबसे बड़ी दुश्मन

बहुत से लोग कहते हैं कि वे ऊपर से नमक नहीं डालते, इसलिए उन्हें लगता है कि नमक कंट्रोल में है। लेकिन असली नमक तो अचार, पापड़, चिप्स, नमकीन, बिस्कुट, ब्रेड और बाहर के खाने में छुपा होता है। यह छुपा हुआ नमक ही दवा के असर को कमजोर कर देता है।
अगर रोज़ नमक ज्यादा लिया जा रहा है, तो दवा कितना भी सही क्यों न हो, BP नीचे नहीं आएगा। यही वजह है कि कुछ लोग दवा बदलते रहते हैं, लेकिन असली समस्या वहीं की वहीं रहती है। नमक कंट्रोल करना BP कंट्रोल का सबसे जरूरी हिस्सा है, जिसे अक्सर हल्के में लिया जाता है।
4. तनाव, चिंता और दिमागी थकान का असर
आज की जिंदगी में तनाव से बचना आसान नहीं है। लगातार सोचते रहना, भविष्य की चिंता, पैसों की टेंशन, नींद की कमी — ये सब दिमाग को कभी आराम नहीं करने देते। जब दिमाग तनाव में रहता है, तो शरीर ऐसे हार्मोन छोड़ता है जो सीधे ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं।\
यही कारण है कि कई लोगों का BP घर पर ठीक रहता है, लेकिन डॉक्टर के पास या तनाव वाली स्थिति में अचानक बढ़ जाता है। दवा शरीर पर काम करती है, लेकिन तनाव दिमाग से BP को ऊपर खींचता रहता है। जब तक तनाव कम नहीं होगा, दवा अकेले पूरी तरह असर नहीं दिखा पाएगी।
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5. मोटापा और खासकर पेट की चर्बी
पेट की चर्बी केवल देखने की समस्या नहीं है, यह शरीर के अंदर बहुत बड़ा बदलाव करती है। पेट के आसपास जमा फैट हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है और नसों पर दबाव डालता है। इससे BP कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
कई लोग सालों से एक ही BP की दवा ले रहे होते हैं, लेकिन वजन बढ़ने के बाद वही दवा कम असर दिखाने लगती है। इसका मतलब यह नहीं कि दवा खराब हो गई, बल्कि शरीर की जरूरत बदल गई है। वजन कम करने से कई बार BP अपने आप काफी हद तक कंट्रोल में आ जाता है।
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6. दूसरी बीमारियाँ जो BP को बढ़ाए रखती हैं
कई बार BP की दवा इसलिए काम नहीं करती क्योंकि शरीर में कोई दूसरी समस्या छुपी होती है। डायबिटीज, थायरॉइड, किडनी की बीमारी या हार्मोनल गड़बड़ी — ये सब ब्लड प्रेशर को लगातार ऊँचा रख सकती हैं।
ऐसे मामलों में केवल BP की दवा काफी नहीं होती। जब तक असली कारण का इलाज नहीं किया जाता, BP कंट्रोल में नहीं आता। इसलिए अगर दवा लेने के बावजूद BP लंबे समय तक हाई बना रहे, तो जांच कराना बहुत जरूरी हो जाता है।
7. गलत BP मशीन और नापने का गलत तरीका
बहुत बार असली समस्या दवा या शरीर नहीं, बल्कि BP नापने का तरीका होता है। आजकल लोग घर पर BP मशीन रख लेते हैं, जो अच्छी बात है, लेकिन उसका सही इस्तेमाल न करना पूरी रिपोर्ट को गलत बना देता है। सस्ती या पुरानी मशीन, गलत cuff size, या बार-बार कैलिब्रेशन न होना BP को ज़्यादा दिखा सकता है।
इसके अलावा, BP नापते समय अगर इंसान शांत न हो, अभी-अभी चलकर आया हो, बात कर रहा हो, मोबाइल देख रहा हो या पैर लटकाकर बैठा हो, तो रीडिंग हाई आ सकती है। कई लोग एक ही बार BP नापते हैं और उसी को फाइनल मान लेते हैं, जबकि सही तरीका यह है कि 2–3 मिनट के अंतर से दो बार BP नापा जाए और औसत देखा जाए।
इसलिए अगर दवा लेने के बावजूद BP हाई दिख रहा है, तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि BP सही तरीके से नापा जा रहा है या नहीं।
8. दवा शरीर को सूट न करना या दवा की जरूरत बदल जाना
हर इंसान का शरीर अलग होता है और हर दवा का असर भी अलग-अलग होता है। जो दवा किसी एक व्यक्ति पर बहुत अच्छा काम करती है, वही दवा दूसरे पर कम असर दिखा सकती है। कई बार ऐसा भी होता है कि जो दवा पहले सही काम कर रही थी, वही कुछ साल बाद असर कम कर देती है।
इसके पीछे कारण हो सकते हैं:
. उम्र बढ़ना
. वजन बढ़ना
. दूसरी बीमारियों का जुड़ जाना
ऐसी स्थिति में डॉक्टर दवा बदलते हैं या दो दवाओं का कॉम्बिनेशन देते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, इसे बीमारी का बिगड़ना नहीं समझना चाहिए। लेकिन अगर कोई व्यक्ति खुद से दवा बदल ले या किसी और की सलाह पर दवा ले ले, तो BP और ज्यादा अनकंट्रोल हो सकता है।
9. शराब और सिगरेट — दवा का असर खत्म करने वाली आदतें
अगर कोई व्यक्ति BP की दवा ले रहा है और साथ में शराब या सिगरेट भी पी रहा है, तो दवा से ज्यादा असर इन आदतों का होता है। शराब ब्लड प्रेशर को सीधे बढ़ाती है और सिगरेट नसों को सख्त कर देती है। इससे BP कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
कई लोग सोचते हैं कि “थोड़ी-सी शराब से क्या होगा” या “दिन में एक-दो सिगरेट से फर्क नहीं पड़ता”, लेकिन BP के मरीज के लिए यह सोच खतरनाक हो सकती है। दवा तब तक पूरी तरह काम नहीं करती, जब तक ये आदतें छोड़ी न जाएँ।
10. नींद पूरी न होना और गलत दिनचर्या
नींद और ब्लड प्रेशर का रिश्ता बहुत गहरा है। जो लोग रोज़ 6 घंटे से कम सोते हैं या देर रात तक मोबाइल देखते रहते हैं, उनमें BP हाई रहने की संभावना ज्यादा होती है। नींद पूरी न होने से शरीर का हार्मोनल सिस्टम बिगड़ जाता है, जिससे BP ऊपर बना रहता है।
इसके अलावा अनियमित दिनचर्या — कभी देर से खाना, कभी बहुत देर तक खाली पेट रहना, पानी कम पीना — ये सब भी BP पर असर डालते हैं। दवा शरीर में जाती है, लेकिन अगर शरीर थका हुआ और असंतुलित है, तो दवा का असर पूरा नहीं मिल पाता।
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11. उम्र बढ़ने के साथ BP कंट्रोल क्यों मुश्किल हो जाता है?
उम्र बढ़ने पर शरीर में कई प्राकृतिक बदलाव आते हैं। नसें धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं, लचीलापन कम हो जाता है और शरीर की प्रतिक्रिया पहले जैसी नहीं रहती। इस वजह से BP को कंट्रोल करने के लिए वही पुरानी दवा या वही मात्रा पर्याप्त नहीं रहती।
यह बीमारी का बिगड़ना नहीं, बल्कि शरीर का स्वाभाविक बदलाव है। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर दवा को एडजस्ट कर लिया जाए, तो BP फिर से कंट्रोल में आ सकता है।
12. कब BP सच में खतरनाक माना जाता है?
अगर BP कभी-कभी थोड़ा ऊपर-नीचे होता है, तो तुरंत डरने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर BP:
. बार-बार 160/100 से ऊपर जा रहा हो
. सिर में तेज दर्द, चक्कर या उलझन हो
. सीने में दर्द या सांस फूलने लगे
तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में देरी नहीं करनी चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
▪️BP कंट्रोल में लाने के लिए क्या करें? (Practical Solutions)

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि BP कंट्रोल एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए दवा के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव जरूरी होता है।
नमक की मात्रा कम करें, पैकेट वाले और बाहर के खाने से दूरी बनाएँ। रोज़ाना हल्की वॉक या एक्सरसाइज की आदत डालें। वजन को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करें। तनाव कम करने के लिए गहरी सांस, ध्यान या कोई पसंदीदा गतिविधि अपनाएँ। नींद पूरी करें और रात को मोबाइल से दूरी बनाए रखें।
BP का एक छोटा सा रिकॉर्ड रखें, जिसमें रोज़ सुबह और शाम BP नोट करें। इससे आपको और डॉक्टर दोनों को स्थिति समझने में आसानी होगी। और सबसे जरूरी बात — दवा कभी भी अपने मन से बंद या कम न करें।
❓FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
❓ BP की दवा लेने के बाद भी प्रेशर हाई रहना क्या नॉर्मल है?
हाँ, शुरुआत में या lifestyle सही न होने पर ऐसा हो सकता है। लेकिन अगर लंबे समय तक BP कंट्रोल में नहीं आ रहा, तो दवा या आदतों की समीक्षा जरूरी है।
❓ क्या BP की दवा जिंदगी भर लेनी पड़ती है?
हर मरीज के लिए जवाब अलग होता है। कुछ लोगों को लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है, जबकि कुछ लोग lifestyle सुधारकर दवा कम या बंद भी कर पाते हैं — लेकिन सिर्फ डॉक्टर की सलाह से।
❓ क्या ज्यादा BP का मतलब दिल का दौरा तय है?
नहीं, लेकिन untreated high BP दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी फेल होने का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। समय पर कंट्रोल किया जाए तो खतरा काफी कम हो जाता है।
❓ BP की दवा अचानक बंद करने से क्या होता है?
दवा अचानक बंद करने से BP तेजी से बढ़ सकता है, जिसे Rebound Hypertension कहते हैं। इससे stroke या heart attack का खतरा बढ़ सकता है। दवा कभी भी खुद से बंद न करें।
❓ क्या आयुर्वेदिक या घरेलू उपाय BP ठीक कर सकते हैं?
कुछ घरेलू उपाय BP को support कर सकते हैं, लेकिन medical treatment का विकल्प नहीं हैं। बिना डॉक्टर से पूछे दवा छोड़कर सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।
❓ BP मरीज को नमक कितना खाना चाहिए?
आमतौर पर BP मरीज को रोज़ 5 ग्राम से कम नमक लेना चाहिए। पैकेट वाले फूड, अचार, नमकीन और बाहर के खाने में छुपा हुआ नमक सबसे ज्यादा नुकसान करता है।
❓ BP मशीन से रोज़ BP नापना सही है?
हाँ, लेकिन दिन में बार-बार नहीं। सुबह और शाम, शांत अवस्था में BP नापें और readings नोट करें। हर बार घबराना या over-check करना stress बढ़ा सकता है।
❓ क्या stress से सच में BP बढ़ता है?
बिलकुल। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो BP को लगातार ऊपर रखते हैं, चाहे आप दवा क्यों न ले रहे हों।
🧑⚕️अंतिम सलाह (Doctor-style लेकिन दोस्ताना 😌)
अगर आप BP की दवा ले रहे हैं और फिर भी प्रेशर हाई है, तो घबराइए नहीं —
लेकिन लापरवाही भी मत कीजिए।
दवा + सही खानपान + हल्की एक्सरसाइज + नींद + तनाव कंट्रोल
👉 यही BP कंट्रोल का पूरा फार्मूला है।
💫निष्कर्ष: BP की दवा के बावजूद BP हाई — एक चेतावनी, अंत नहीं
BP की दवा लेने के बाद भी प्रेशर हाई रहना इस बात का संकेत है कि शरीर कुछ बदलाव चाहता है। यह दवा की नाकामी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि जीवनशैली, आदतें या अंदरूनी स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।
अगर समय रहते सही कदम उठा लिए जाएँ, तो BP को लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सकता है और गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। धैर्य, समझदारी और नियमित देखभाल — यही BP कंट्रोल की असली कुंजी है।
Last Updated: 02/02/2026
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